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3D Printing क्या है? इसके क्या क्या फायदे है? What is 3D Printing IN HINDI

इस technology के आधुनिक युग मे कई तरह की टेक्नोलॉजी का आविष्कार हो चुका है उसी मे से 1 Technology है 3D Printing, जिससे कई तरह की industries निर्भर है इस टेक्नोलॉजी पर, तो चलिये हम जानते पुरी जानकारी 3D प्रिंटिंग क्या है वह भी हिन्दी मे सरल शब्दों द्वारा।

आज के आधुनिक ज़माने मे कई नयी नयी मशीनो और चीज़ो का आविष्कार हो चुका है जिसके इस्तेमाल से व्यक्ति का वक़्त और पैसा दोनो मे बचत होती है और quality परिणाम तो अदभुत ही मिलता है आज हम आपको एसे ही एक चीज़ के बारे मे बताते हे जिसका नाम है 3D प्रिंटिंग, तो चलिये आपको इसके बारे मे पुरी जानकारी देते है वह भी हिन्दी मे सरल शब्दों द्वारा।

3D प्रिंटिंग क्या है? What is 3D Printing

3 डी प्रिंटिंग, जिसे एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग के रूप में भी जाना जाता है, एक निर्माण प्रक्रिया है जहां 3 डी प्रिंटर ऑब्जेक्ट (चीज़) के 3 डी डिजिटल मॉडल के अनुसार Layer (परत) द्वारा सामग्री Layer जमा करके तीन Dimentional (आयामी) ऑब्जेक्ट (चीज़) बनाता है।

एक सामान्य प्रिंटर सिर्फ 2D मे ही प्रिंट दे सकता है, उसमे भी Default आउटपूट तो ब्लैक ऐंड वाइट ही मिलेगा, अगर जो टोनर कलर को सपोर्ट करता होगा तो कलर प्रिंट निकल सकेगा, मगर 3D प्रिंट बहोत ही Advance Technology है, जिसमे कंप्यूटर मे तैयार कीया ऑब्जेक्ट (चीज़), डिज़ाइन, आकार, डोक्युमेंट, चीज़ या Layout (खाका) का Three Dimension (तीन आयामी) पिक्चर मिलता है, मतलब की कोई चीज़ जेसा की बच्चे का खिलौना आप कंप्यूटर स्क्रीन पर तैयार करो आप उसकी प्रिंट निकालकर दुकान या मकान मे शो पीस तरीके से रख सकते है, 2D मे आप उस पिक्चर को सिर्फ एक ही angle से देख सकते हो जबकी 3D मे आप 360 डीग्री ऐंगल से देख सकते है, इतना ही नही 3D प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी मे प्रिंटर चीज़ो को वास्तविक रूप से आकार देता है, यह एक एसी टेक्नोलॉजी है की जो कोई डिजिटल फ़ाईल या प्रोसेस को बिल्कुल सही फॉर्मेट मे सेव करके plain surface (समतल सतह) पर 3D प्रिंट तैयार करता है, पहले यह सब चीज़े कंप्यूटर मे virtually (वास्तव मे) दिखायी देती है बाद मे उस चीज़ का प्रिंट शुरू होता है, जिस तरीके से प्रिंट का preview देख सकते है उस तरीके से चीज़ केसी दीखेगी, कितनी साइज़ मे प्रिंट होगी उसका पूरा रिपोर्ट आप स्क्रीन पर देख सकते है, इसके लिये कुछ ज़रुरी software और plugin अनिवार्य है,  क्योकि यह कोई सामान्य document का प्रिंटिंग नही है, कंप्यूटर मे तैयार किया हुवा ग्राफिक्स को वास्तविक स्वरूप देने मे आता है, मतलब की paint मे तैयार किया हुवा टूल्स इसमे से बहार ना भी आ सके यह भी हो सकता है, क्योकि यह एक Object design technology के साथ जुड़ा हुवा है।

3D Object तैयार करने के लिये Editive process का इस्तेमाल होता है, जिसमे एक object को तैयार करके उसे materialized करने मे आता है जो तमाम layer पर आधार रखता है, जिस तरीके से फ़ोटोशॉप मे लेयर होते है वैसे, खास करके जब कलर्स देने मे आता है तब बहोत ही ध्यान रखना पड़ता है, मल्टी कलर ऑब्जेक्ट मे कलर मेचिंग हो और शेड आ जाये तब पिक्चर खराब भी हो सकता है।

3D प्रिंटिंग की शुरुआत कब और किसके द्वारा हुई?

2 जुलाई 1984 को, अमेरिकी उद्यमी बिल मास्टर्स ने अपने कंप्यूटर ऑटोमेटेड मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस एंड सिस्टम के लिए एक पेटेंट दायर किया। यह फाइलिंग यूनाइटेड स्टेट पेटन्ड ऐण्ड ट्रेड़मार्क ऑफ़िस में इतिहास के पहले 3 डी प्रिंटिंग पेटेंट के रूप में रिकॉर्ड पर है, यह मास्टर्स से संबंधित तीन पेटेंटों में से पहला था जिसने आज इस्तेमाल किए जाने वाले 3 डी प्रिंटिंग सिस्टम की नींव रखी।

1984 में, 3D सिस्टम कॉरपोरेशन के Charles Chuck Hull ने एक stereolithography (स्टीरियोलिथोग्राफ) फ़ेब्रिकेशन सिस्टम के लिए अपना पेटेंट दायर किया, जिसमें पराबैंगनी प्रकाश (ultraviolet light) पराबैंगनीकिरण के साथ फोटोपोलाइमर का इलाज करके परतों को जोड़ा जाता है, Hull ने इस प्रक्रिया को “गठित की जाने वाली वस्तु का एक क्रॉस-सेक्शनल पैटर्न बनाकर तीन आयामी वस्तुओं को उत्पन्न करने के लिए प्रणाली” के रूप में परिभाषित किया, Chuck Hull का योगदान एसटीएल (स्टीरोलिथोग्राफी) फ़ाइल स्वरूप और डिजिटल स्लाइसिंग और इन्फिल रणनीति आज कई प्रक्रियाओं के लिए सामान्य है।

1986 में, Charles Chuck Hull को उनकी प्रणाली के लिए एक पेटेंट दिया गया था, और उनकी कंपनी, 3 डी सिस्टम कॉर्पोरेशन ने पहला वाणिज्यिक 3 डी प्रिंटर, SLA -1 जारी किया था।

स्क्रीन पर Objects (चीज़ो) की प्रिंट किस तरह से होती है?

डोक्यूमेंट या फिर पिक्चर के 2D प्रिंट मे ink (स्याही) का इस्तेमाल होता है जबकी यहा पर खास तरीके का मॉम और प्लास्टिक का combination होता है, 3D प्रिंट सामान्य प्रिंट से बिल्कुल ही अलग होता है, जिसमे एक ऑब्जेक्ट को छोटे छोटे टुकड़ो मे काटने मे आता है, आपने स्कूल मे x, y, z Angle का फॉर्मूला तो पढ़ा ही होगा वह फॉर्मूला यहा भी apply होता है, जिसके लिये एक आकर्षक मिलिंग मशीन का इस्तेमाल होता है, उसके बाद आकार, उचाई, लम्बाई, ऊँडायी और सबसे लास्ट मे कलर नक्की होता है, उसके बाद filling, turning, cutting और grind मेथड प्रोसेस का इस्तेमाल किया जाता है, ऑब्जेक्ट जित्ना shape और sharp होगा उतना ही प्रिंटिंग बेस्ट निकलेगा, जैसे जैसे Editive method मे upgradation होते गया उसका सिधा फायदा यह टेक्नोलॉजी को हुवा, भविष्य मे कोई भी product या picture के Presentation (प्रस्तुतीकरण) के लिये जो कोई basic चीज़ सस्ती हुई  तो हर जगह 3D प्रिंट अपनी जगह बनाएगा, खास तौर पर अलग-अलग map (नक्शा) बनाने मे।
कंप्यूटर डिज़ाइन फ़ाईल (CAD) का यहा सिधा इस्तेमाल होता है उसके लिये खास इसका course करना और paractical जानकारी ज़रुरी है,  जिस तरीके से कंप्यूटर मे base नक्की किया जाता है उसी तरीके से मशीन मे surface फिक्स होता है, जो 3D मॉडलिंग सॉफ्टवेयर पर मज़बूत पकड़ हो तो प्रिंटिंग काम आसान हो जाता है, जब भी प्रिंटिंग मशीन मे प्रिंट के लिये command दिये जाते है तब वह सबसे पहले डाटा  किस चीज़ का है उसका Analysis (विश्लेषण) करता है, उसके बाद उसका Coordinate (समन्वय) नक्की किया जाता है, चारो ओर से उसका एक perfect माप नक्की होने के बाद प्रिंटिंग के लिये चीज़ आगे scan के लिये जाति है, सामान्य document जैसा इसका scan प्रोसेस नही होता, उसके बाद फिक्स किये हुवे material के surface पर न्क्की किये हुवे साइज़ और माप के आधार पर वह चीज़ आकर्षक रूप से तैयार हो जाति है।

3D इस्तेमाल के लिये क्या चीज़ की आवश्यकता है और कौनसी चीज़ो का इस्तेमाल होता है?

प्रिंट टेक्नोलॉजी भले ही जो कोई भी हो मगर वह खास ऐप्लिकेशन और सॉफ्टवेयर के आधार पर काम करता है, जैसे के आख अखबार प्रिंट के लिये बटर फ़ाईल टेक्निक, प्लेट टेक्निक जिसे मशीन मे डालने के बाद डाटा Expand हो जाता है, मगर जब भी प्लेट या बटर प्रिंटिंग के दौरान थोड़ा भी हिल जाये तो प्रिंट के अक्षर  छोटे बड़े हो जाते है और उसे पढ़ने के दौरान आंखे खीचने लगती है, इसी तरह 3D प्रिंटिंग के लिये खास ऐप्लिकेशन और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल compulsory किया जाता है।

3D printing के लिये इन चीज़ो का इस्तेमाल होता है जैसे Ceramics, खास प्रकार के paper, Concrete, metal धातु, एक तरह का खास मीन पदार्थ और polymers का इस्तेमाल किया जाता है।

3D Printer कितने प्रकार के है?

3D प्रिंटर के कुछ प्रकार इस तरह है

1) SLA 3D Printer :-

SLA (Stereolithography) एक एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस है, जो एक यूवी लेजर को फोटोपॉलिमर राल के एक वैट पर फोकस करके काम करता है। कंप्यूटर एडेड मैन्युफैक्चरिंग या कंप्यूटर एडेड डिजाइन (CAM / CAD) सॉफ्टवेयर की मदद से, यूवी लेजर का उपयोग फोटोपॉलिमर वैट की सतह पर एक पूर्व-प्रोग्राम किए गए डिजाइन या आकृति को खींचने के लिए किया जाता है। Photopolymers पराबैंगनी प्रकाश (ultra violet light) के प्रति संवेदनशील होते हैं, इसलिए राल photochemically solidified होता है और वांछित 3D ऑब्जेक्ट की एक परत बनाता है। यह प्रक्रिया 3D ऑब्जेक्ट के पूर्ण होने तक डिज़ाइन की प्रत्येक परत के लिए दोहराई जाती है।

2) SLM 3D Printer :-

SLM प्रिंटिंग चयनात्मक लेजर पिघलने वाली तकनीक का उपयोग करती है जो धातु पाउडर को पिघलाती है और परत को परत को ठोस करती है जब तक कि एक त्रि-आयामी भाग नहीं बनता है। प्रक्रिया के दौरान, बिल्ड चैंबर में शासक धातु पाउडर की एक परत को प्रशस्त करेगा, एक उच्च शक्ति वाला लेजर चयनात्मक रूप से पाउडर बेड की सतह पर भाग के क्रॉस-सेक्शन को ट्रेस करके पाउडर को फ़्यूज़ करता है और फिर सामग्री का एक नया कोट होता है। अगली परत के लिए आवेदन किया। उच्च तापमान पर ऑक्सीजन के साथ धातु पाउडर प्रतिक्रिया से बचने के लिए पूरी प्रक्रिया एक उच्च वैक्यूम कक्ष या सुरक्षात्मक गैस कक्ष से भरी होती है।

3) AMC 3D Printer :-

ZRapid सिरेमिक 3 डी प्रिंटिंग तकनीक तेजी से उत्पादन जटिल अनुकूलित सिरेमिक उत्पादों के लक्ष्य को प्राप्त कर सकती है, उत्पादन लागत को कम कर सकती है और विनिर्माण समय को छोटा कर सकती है। यूवी लेजर को इस तकनीक में सिरेमिक पेस्ट में बहुलक को क्रॉस-लिंक करने के लिए नियोजित किया गया था, जिसने इस समस्या को हल कर दिया कि पारंपरिक सिरेमिक मोल्डिंग में भंगुरता (Brittleness) और सिरेमिक सामग्री की उच्च कठोरता के कारण जटिल आकार और संरचना के साथ सिरेमिक भाग को प्रिंट करना मुश्किल है।

4) SLS 3D Printer :-

SLS प्रिंटिंग चयनात्मक CO₂ लेजर सिंटरिंग तकनीक का उपयोग करती है जो तीन-आयामी हिस्से के निर्माण तक परत द्वारा ठोस क्रॉस-सेक्शन परत में प्लास्टिक पाउडर (बाइंडिंग एजेंट के साथ सिरेमिक या धातु पाउडर) को सिंटर्स (धातुमल) करती है। भागों को बनाने से पहले, बिल्ड चैम्बर को नाइट्रोजन से भरने और चैम्बर के तापमान को बढ़ाने की आवश्यकता होती है। जब तापमान तैयार हो जाता है, तो एक कंप्यूटर नियंत्रित CO temperature लेजर चयनात्मक रूप से पाउडर बेड की सतह पर भाग के क्रॉस-सेक्शन को ट्रेस करके पाउडर सामग्री को फ्यूज कर देता है और फिर नई परत के लिए मैटरियल का एक नया कोट लगाया जाता है। पाउडर बेड का काम करने वाला प्लेटफ़ॉर्म एक परत नीचे जाएगा और फिर रोलर पाउडर की एक नई परत को खोद देगा और लेजर चुनिंदा भागों के क्रॉस-सेक्शन को sinter (धातुमल) कर देगा, जब तक सब भाग पूरे ना हो तब  तक प्रक्रिया को दोहराते रहे।

5) FMS 3D Printer :-

FMS प्रिंटिंग चयनात्मक CO₂ लेजर सिंटरिंग तकनीक का उपयोग करता है जो तीन-आयामी भाग के निर्माण तक परत द्वारा ठोस क्रॉस-सेक्शन परत में प्लास्टिक पाउडर (बाइंडिंग एजेंट के साथ सिरेमिक या धातु पाउडर) को सिंट करता है। भागों को बनाने से पहले, बिल्ड चैम्बर को नाइट्रोजन से भरने और चैम्बर के तापमान को बढ़ाने की आवश्यकता होती है। जब तापमान तैयार हो जाता है, तो एक कंप्यूटर नियंत्रित CO temperature लेजर चयनात्मक रूप से पाउडर बेड की सतह पर भाग के क्रॉस-सेक्शन को ट्रेस करके पाउडर सामग्री को फ्यूज कर देता है और फिर नई परत के लिए मैटरियल का एक नया कोट लगाया जाता है। पाउडर बेड का वर्किंग प्लेटफॉर्म एक लेयर नीचे जाएगा और फिर रोलर पाउडर की एक नई परत को खोद देगा और लेजर चुनिंदा हिस्सों के क्रॉस-सेक्शन को सिन्टर करेगा, जब तक सब भाग पूरे ना हो तब  तक प्रक्रिया को दोहराते रहे।

3D software कौन कौन से है?

3D सॉफ्टवेयर के कई सारे versions हे जिनमे से कुछ लिस्ट आपको यहा बता देता हू।

3D-Coat

3D Slash

Blender

Adobe dimension

AutoCAD

AutoQ3D

Autodesk 3Ds Max

Remo3D

Sketchup

SharkCAD

Zbrush

Zmodeler

3D प्रिंटिंग के क्या फायदे है?

1) Faster Production :-

3D technology प्रिंटिंग से चीज़ो का उत्पादन बहोत ही स्पीड से होता है, 3D प्रिंटिंग की स्पीड को रेपिड़ प्रोटो टाइपिंग भी कह सकते है

2) Easy Accessible ( उपलब्धी मे आसानी) :-

3D प्रिंटिंग बाजार मे आसानी से उप्लब्ध है, कुछ सालो से इस technogy की सफलता को नज़र रखते हुवे यह हर बड़े शहरो मे आसानी से उप्लब्ध हो जाता है।

3) Better quality :-

3D प्रिंटिंग सामान्य प्रिंटिंग के मुकाबले बेहतर से बेहतर गुणवत्ता देता है, किसी भी ऑब्जेक्ट की डिज़ाइन, कलर और finishing की गुणवत्ता मे कमी नही आने देता।

4) Tangible Design (वास्तविक डिज़ाइन)& Product Testing :-

स्क्रीन पर किसी उत्पाद को देखने का कोई तरीका नहीं है, 3 डी प्रिंटिंग से यह लाभ मिलता है, शारीरिक रूप से इसका परीक्षण करने और डिजाइन में खामियां खोजने के लिए उत्पाद प्रोटोटाइप के स्पर्श और अनुभव का अनुभव करना संभव है। यदि कोई समस्या पाई जाती है, तो आप CAD फ़ाइल को संशोधित कर सकते हैं और अगले दिन तक एक नया संस्करण प्रिंट कर सकते हैं।

5) Cost (लागत) :-

छोटे से उत्पादन और अनुप्रयोगों के लिए 3D प्रिंटिंग सबसे अधिक लागत प्रभावी विनिर्माण प्रक्रिया है। सीएनसी मशीनिंग और इंजेक्शन मोल्डिंग जैसे पारंपरिक प्रोटोटाइप तरीकों के लिए बड़ी संख्या में महंगी मशीनों की आवश्यकता होती है और साथ ही उन्हें उच्च श्रम लागत की आवश्यकता होती है क्योंकि उन्हें चलाने के लिए अनुभवी मशीन ऑपरेटर और तकनीशियनों की आवश्यकता होती है, यह 3D प्रिंटिंग प्रक्रिया के विपरीत है, जहां एक भाग के निर्माण के लिए केवल 1 या 2 मशीनों और कम ऑपरेटरों की आवश्यकता होती है।

6) Risk Reduction ( जोखिम मे कमी)  :-

क्‍वालिटी और कंसिस्टेंसी की वजह से 3 डी प्रिंटिंग एक बिजनेस को मैन्युफैक्चरिंग में इसके जोखिमों को कम करने की अनुमति देता है। 3 डी प्रिंटिंग तकनीक उत्पाद निर्माताओं को पर्याप्त विनिर्माण निवेश पर शुरू करने से पहले उत्पाद के प्रोटोटाइप को सत्यापित करने की अनुमति देती है जो संभावित विनाशकारी हो सकता है।

3D प्रिंटिंग के कुछ Limitations (सीमाए)

3D प्रिंटिंग की जितनी ज़्यादा फायदे है उऐ तरह उसकी कुछ मर्यादा एवम् सीमाए भी है,

प्रिंटिंग के लिये जिस तरीके से कागज़ की ज़रुरत होती है वैसे 3D के लिये कॉम्बिनेड मटिरियल की आवश्यकता रहती है जिसे पिघलाकर आकर फिय जाता है जो की महँगा है।

3D मशीन operater को काफ़ी सावधानी के साथ उसे operate करना पड़ता है खास करके उसमे से निकालने वाले laser बिंब से आंखो की care करना काफ़ी आवश्यक है।

3D प्रिंटिंग मशीन काफ़ी महंगे रहते है, यह पूरा के पूरा laser टेक्नोलॉजी पर काम करता है।

3D प्रिंटिंग Applications ओर उसके पार्टस काफ़ी महंगे रहते है, वह हर किसी प्रिंटिंग यूनिट के बजट के बाहर है, हा वैसे उसके income input काफ़ी बढ़िया है।

3D machines के इस्तेमाल के लिये वोल्ट का इस्तेमाल ज़्यादा होता है, electricity बिल काफ़ी महँगा पड़ता है।

3D प्रिंटिंग का इस्तेमाल induatries मे

वैसे 3D प्रिंटिंग का इस्तेमाल काफ़ी सारी इन्डस्ट्रीस मे किया जाता है मगर यहा हम आपको कुछ industries के बारेमे बता देते है की कौन-कौन सी  induatries मे 3D प्रिंटिंग का इस्तेमाल होता है।

1) Manufacturing :-

कंपनियां पारंपरिक मूल्य के एक अंश पर कस्टम, कम-वॉल्यूम टूलींग और फिक्स्चर बनाने में सक्षम हैं, जिससे डिजाइनरों और इंजीनियरों को राजस्व पैदा करने वाले भागों पर खर्च करने के लिए अधिक समय मिल सके। लघु निर्माताओं को विशाल, वैश्विक निर्माताओं के रूप में 3 डी प्रिंटर के साथ समान लाभ मिलता है, डाउनटाइम को कम करते हुए प्रसंस्करण में सुधार और तेजी लाने के लिए, कंपनियां श्रम लागत और समय की बचत करते हुए अधिक रचनात्मक स्वतंत्रता प्राप्त करने में सक्षम हैं। उदाहरण के लिए, मेटल फैब्रिकेशन कंपनी ने एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग (DFAM) के लिए डिजाइन के साथ 3 डी प्रिंटिंग का रुख किया है, जिससे उन्हें प्रति टूल कई हजारो डॉलर की बचत कर सकती है।

2) Education:-

जैसे ही 3 डी प्रिंटिंग उद्योग बढ़ता है, शिक्षण संस्थान अनुसंधान और शिक्षा के उद्देश्यों के लिए नई तकनीक के अत्याधुनिक होने पर सुनिश्चित करने के लिए दौड़ रहे हैं, शैक्षिक उपकरण के लिए प्रोफेसरों के प्रिंटिंग भागों से लेकर पीएचडी छात्रों को शोध के लिए प्रिंटर का उपयोग करने के लिए पाठ योजना से अवगत कराने के लिए, 3 डी प्रिंटर कॉलेजों में विभिन्न प्रकार के उद्देश्यों की पूर्ति करते हैं,  इंडियाना के purdue university (विश्वविद्यालय) जैसे कॉलेजों ने अपने छात्रों को उभरते हुए निर्माण सामग्री और प्रौद्योगिकी के बारे में पढ़ाने में बहुत रुचि ली है।

3) Robotics:-

Customizability से लेकर कम वजन तक, सफल रोबोटिक्स के पुर्जे बनाने वाले कारक 3 डी प्रिंटिंग क्षमताओं के साथ अच्छे से मेल खाते हैं। ग्रिपर्स और सेंसर माउंट्स जैसे भागों का उत्पादन महंगा पड़ता है और विभिन्न उपयोगों के लिए कस्टम डिज़ाइन किए जाने की आवश्यकता है, इसिलिए रोबोटिक्स के इंजीनियर एंड-टू-आर्म टूलिंग और एंड-यूज पार्ट्स के लिए 3 डी प्रिंटर का उपयोग करते हैं, ग्रिपर उंगलियों से लेकर पूरे रोबोट घटकों तक समग्र उत्पाद के वजन को कम करने के लिए सुनिश्चित करते हैं कि उपकरण तेजी से आगे बढ़ सकते हैं और भारी वस्तुओं को ले जा सकते हैं। गैर-अनुकूलित डिज़ाइन के लिए बड़ी मात्रा में पैसे देने के बजाय, Markforged 3D प्रिंटर रोबोटिक्स कंपनियों को लागत के एक अंश पर एंड-टू-आर्म टूलिंग जैसे जटिल भागों को डिज़ाइन और बनाने की अनुमति देते हैं। हैडिंगटन डायनेमिक्स, अपने चार प्रिंटर का इस्तेमाल नासा और GoogleX के लिये करता है जबकी यह Regular उत्पादन से 58% कम 3D प्रिंटिंग रोबोट हथियार बनाने के लिये कर रहे है।

4) Aerospace :-

एयरोस्पेस उद्योग कुछ उच्चतम मानकों में से एक हैं। एयरोस्पेस के भागों को काफ़ी अत्यधिक तापमान और रसायनों का सामना करना पड़ता है और अधिक लोडिंग समस्या का हल निकालने के लिये इंजीनियर 3D प्रिंटिंग्का इस्तेमाल करने लगे है, व्यक्तिगत जान और विमान सफल बनाने के लिये यह 3D प्रिंटिंग विकल्प एकदम perfact है, चूंकि विमान के लिए भाग सटीक है, एयरोस्पेस इंजीनियरों ने कम मात्रा वाले भागों के लिए लागत को कम करने के लिए 3 डी प्रिंटिंग निरीक्षण टूलिंग का इस्तेमाल करना अपना लिया है।

5) Automotive :-

मोटर वाहन उद्योग 3 डी प्रिंटर का उपयोग करके कई महँगी luxurious  car Audi, Mercidiez, BMW जैसी हाई-प्रोफाइल कंपनियों के साथ एडिटिव विनिर्माण के लिए आगे बढ़ रहा है। यह दुनिया के सिर्फ Audi, BMW सिर्फ 3D प्रिंटर का उपयोग नहीं कर रहे है बल्कि प्रत्येक कार निर्माता कंपनी रेस कार टीमों से लेकर उप निर्माताओं (OEM) तक सब कुछ 3 डी प्रिंटर का उपयोग कर रहे हैं। मोटर वाहन निर्माताओं के लिए 3 डी प्रिंटेड भाग वास्तविक मूल्यरूप से वर्तमान में कारों पर किये जाने वाले प्रिंटिंग भागों जैसा नही होता है, विनिर्माण प्रक्रिया को सहायक बनाने वाले टूलिंग और फिक्स्चर 3D प्रिंटिंग के लिये काफ़ी महत्त्वपूर्ण है। मोटर वाहन निर्माताओं द्वारा प्रिंटिंग मे सबसे बड़ा challenge आम भागों को जोड़ना, रखरखाव और प्रोटोटाइप हैं, जिन्हें कठोर और मजबूत और टिकाऊ होने की आवश्यकता है।

3D Printing क्या है आर्टिकल का आखरी शीर्षक

मे आशा करता हू की मेरा यह Article आपको ज़रूर अच्छा लगा होगा और आपने इस पोस्ट (3D printing क्या है? ) की माध्यम से बहोत कुछ सिखा होगा ।

मेरा यही लक्ष्य रहा है की आप जब मेरा यह आर्टिकल 3D प्रिंटिंग क्या है? को पढ़ें तो आप को इस के related पुरी के पुरी जानकारी प्राप्त हो वह भी हिन्दी मे सरल शब्दो द्वारा।

अगर आप यह Article के प्रति कुछ कहना चाहते है या कोई शंका है तो आप नि:संकोच होकर निचे Comments मे बता सकते है।

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31 replies on “3D Printing क्या है? इसके क्या क्या फायदे है? What is 3D Printing IN HINDI”

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