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ब्रॉडकास्टिंग टेक्नोलॉजी क्या है? What is Broadcasting Technology IN HINDI

सारी दुनिया के लॉग और आप जो टेलीविज़न पर और इंटरनेट के माध्यम से फुटबॉल, क्रिकेट, ओलंपिक गेम, पोलिटिकल स्टेज स्पीच, न्यूज़ या और कोई जिवंत प्रसारण (Broadcast) देखते है वह सारी सुविधाये ब्रॉडकास्टिंग टेक्नोलॉजी की देन है, तो चलिये हम आपको ब्रॉडकास्टिंग टेक्नोलॉजी क्या है इसके बारे मे पूरी पूरी जानकारी देते है वह भी हिन्दी मे सरल शब्दों द्वारा।

आप अपने मोबाइल या टीवी स्क्रीन पर दुसरे देशो मे होने वाली क्रिकेट मैच, फुटबॉल मैच, ओलम्पिक गेम, देश और विदेश के ताज़ा समाचार बिल्कुल लाइव टाईम मे घर बैठे आसानी से देख सकते है क्या आपको पता है यह आप कैसे देख सकते है जबकी यह तो उस जगह से काफ़ी दूर होते हो, उसके पीछे सिर्फ और सिर्फ एक टेक्नोलॉजी का कमाल है और वह है Broadcasting Technology, जिसमे कुछ Technical expert कंट्रोल रुम मे से पूरा vision को लाखों करोड़ो दर्शको को तक लाइव टेलीकास्ट प्रोग्राम पहोचाते है, तो चलिये हम जानते है पूरी पूरी जानकारी ब्रॉडकास्टिंग टेक्नोलॉजी के बारे मे वह भी हिन्दी मे सरल शब्दों द्वारा।

ब्रॉडकास्टिंग टेक्नोलॉजी क्या है? What is Broadcasting technology

विडियो संकेतों को एक स्थान से सभी दिशाओं में, या किसी एक दिशा में फैलाना Broadcasting (प्रसारण) कहा जाता है, सूचना की क्रांति में ब्रॉडकास्ट एक अहम माध्यम साबित हुआ है। ब्रॉडकास्टिंग (प्रसारण) एक प्रकार का माध्यम है, जिसकी मदद से ऑडियो और वीडियो कंटेंट को इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन (रेडियो वेव्स) के माध्यम से सैटेलाइट तक पहुंचाते हैं और वहां से वापस आकर यह कंटेट रेडियो या टेलीविजन उपकरणों में पहुंचता है। जिनमें कैमरा, माइक्रोफोन्स, स्विचर्स, एडिटिंग सिस्टम, स्टोरेज सिस्टम और स्टूडियो रूम और ट्रांसमीटर कक्षों में विशेष तकनीकी सुविधाओं की आवश्यकता होती है। इस पूरी प्रक्रिया को ब्रॉडकास्टिंग टेक्नोलॉजी कहा जाता है।

ब्रॉडकास्ट (प्रसारण) करने के लिये किन किन चीज़ो की अवश्यक्ता रहती है?

लाइव क्रिकेट मैच या कोई लाइव स्टेज प्रोग्राम यह लाखों-करोड़ों दर्शक इसे देखते है, एसे किसी भी प्रोग्राम को लाइव दिखाने के लिये किसी एक channel का चुनाव करके पूरे कार्यक्रम को लाइव दिखाया जाता है, इसके लिये ऑनलाइन ब्रॉडकास्टिंग (OB) वान की ज़रुरत रहती है, मगर जब क्रिकेट मैच, फुटबॉल मैच या अवार्ड प्रोग्राम जैसा कोई बड़ा event हो तब ऑनलाइन ब्रॉडकास्टिंग करने वाली control van होती है उसके साथ ऑनलाइन ब्रॉडकास्टिंग होता है, जितने कैमरे ग्राउंड या अवार्ड प्रोग्राम मे होते है उतने कैमरे का output cabels यह control room मे आते है, यह कैमरे के Cabels एक रिकॉर्डिंग रुम से प्रोसेस होकर Relay होता है, जिसे portabal relay station कहा जाता है, जिसमे डिश होती है और उसके केबल कंट्रोल रुम मे दिये हुवे होते है, एक मास्टर मॉनिटर होता है, जो आप TV स्क्रीन पर देख सकते है वही हुबहू प्रोग्राम मास्टर मॉनिटर मे दिखता है, यह पुरे कंट्रोल यूनिट को broadcast room कहा जाता है।

ब्रॉडकास्टिंग का जन्म कब और किसके द्वारा हुवा?

ब्रॉडकास्ट (प्रसारण) में एयरवेव पर टेलीग्राफ सिग्नल भेजने का काम सबसे पहले Morse code द्वारा किया गया, इस विकसित प्रणाली सिस्टम को develope 1830 के दशक में Samuel F.B, Morse code, Alfred veil और भौतिक विज्ञानी joseph henry द्वारा किया गया, उन्होंने एक विद्युत टेलीग्राफ प्रणाली विकसित की, जो cabels के साथ विद्युत प्रवाह (Electric Current) की Pulses को भेजती थी जो एक इलेक्ट्रोमैग्नेट को नियंत्रित करती थी जो टेलीग्राफ सिस्टम के प्राप्त छोर पर स्थित थी, केवल इन Pulses और उनके बीच की silence का उपयोग करके प्राकृतिक भाषा को प्रसारित करने के लिए एक कोड की आवश्यकता थी, इसलिए Morse code ने आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय मोर्स कोड को विकसित किया, मोर्स कोड 160 से अधिक वर्षों से उपयोग किया गया है यह एक किसी भी अन्य विद्युत कोडिंग प्रणाली की तुलना में लंबे वक़्त से है, यह पहले जहाज-से-जहाज के लिये और जहाज-से-किनारे पर संचार के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण था, लेकिन बाद मे यह व्यापार और सामान्य समाचार रिपोर्टिंग के लिए तेजी से महत्वपूर्ण हो गया।

20 वीं शताब्दी के पहले दशक में ऑडियो प्रसारण प्रयोगात्मक रूप से शुरू हुआ, 1920 के दशक के प्रारंभ में रेडियो प्रसारण एक घरेलू माध्यम बन गया, पहले AM (Analog Module) Bandwidth द्वारा और बाद में FM (Frequrncy Module) Bandwidth द्वारा।

टेलीविजन प्रसारण ने 1920 के दशक में प्रयोगात्मक रूप से शुरू किया बाद मे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद  VHF (Very high Frequency) और UHF (Ultra high frequency) स्पेक्ट्रम का उपयोग करके व्यापक हो गया, सैटेलाइट प्रसारण 1960 में शुरू किया गया था और 1970 के दशक में सामान्य उद्योग उपयोग में ले जाया गया, 1980 के दशक में DBS (डायरेक्ट ब्रॉडकास्ट सैटेलाइट) के साथ उपयोग मे लाया गया।

Broadcasters द्वारा Analog signal को Digital signal मे कब और किस लिये Convert किया गया?

मूल रूप से सभी प्रसारण Analog ट्रांसमिशन तकनीक का उपयोग करके
Analog signal से बना था, लेकिन 2000 के दशक में, ब्रॉडकास्टर्स ने  डिजिटल ट्रांसमिशन का उपयोग करके डिजिटल सिग्नल पर स्विच किया है, सामान्य उपयोग में सबसे अधिक बार प्रसारित करना और विभिन्न स्रोतों से आम जनता तक सूचना और मनोरंजन प्रोग्रामिंग के प्रसारण को प्रस्तुत करता है, जैसे

  • Analog audio से HD Radio
  • Analog television से Digital television
  • Wireless

रेडियो तरंगों द्वारा एक रेडियो या टेलीविजन स्टेशन से घर रिसीवर के लिए रेडियो और टेलीविजन कार्यक्रमों आके प्रसारण को “ओवर द एयर” (OTA) या स्थलीय प्रसारण के रूप में संदर्भित किया जाता है और अधिकांश देशों में प्रसारण लाइसेंस की आवश्यकता होती है। एक तार या केबल का उपयोग करते हुए प्रसारण, जैसे केबल टेलीविजन (जो उनकी सहमति से ओटीए स्टेशनों को भी रिट्रेस करता है) को भी प्रसारण माना जाता है, लेकिन इसके लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं है (हालांकि कुछ देशों में, लाइसेंस की आवश्यकता होती है)। 2000 के दशक में, डिजिटल तकनीक को स्ट्रीमिंग के माध्यम से टेलीविजन और रेडियो कार्यक्रमों के प्रसारण को तेजी से प्रसारण के रूप में संदर्भित किया गया है।

Broadcasting सिस्टम काम कैसे करता है?

जिस चीज़ का ब्रॉडकास्टिंग करना हो जैसे फुटबॉल की मैच का ग्राउंड हो उसके थोडे दूर ब्रॉडकास्ट ट्रक या वान को इस तरह से Stand करने मे आता है, जिससे सारे कैमरा के आउटपूट क्लीन आये और जब Broadcasting प्रोग्राम के relay करे तब किसी भी तरह का ग्लिचर्स (पिक्चर्स चिपकती हो उसे ग्लिचर्स कहते है) या फ्रिज़ (पिक्चर्स अटक जाये उसे फ्रिज़ कहते है) प्रॉब्लम ना आये, इसमे dish लगी हुई ट्रक या वान दूर रहती है और कंट्रोल रुम अलग होता है, जिसमे केबल की मदद से अलग अलग कैमरे से continue वीडियो आते रहता है, कोई camera किसी खिलाड़ी को शूट करता है तो कोई कैमरा दर्शको को शूट करता है, कोई कैमरा फुटबॉल को शूट करता है तो कोई कैमरा Commentry box मे बैठे Commentator को शूट करता है, यह शूट किये हुवे सारे के सारे वीडियों एक जगह पर जमा होते है उसके बाद शेडयुलर नक्की करते है की कोनसा वीडियों कब, किस तरह और कित्ने duration Time के लिये  relay करना है, सभी कैमरामैन के पास ओडियो आउटपुट रहता है, कंट्रोल रुम से जो Command दिया जाता है वैसे कैमरामैन अपने कैमरे की lense को मूव करता है, यह कंट्रोल रूम और कैमरामैन के बिच की बातचीत दर्शक स्क्रीन या TV के स्पीकर पर सुन नही सकते क्योकि वह ओडियो रिले नही की जाती।

Broadcasting टेक्नोलॉजी मे कितने प्रकार की सिस्टम होती है?

ब्रॉडकास्टिंग टेक्नोलॉजी मे दो प्रकार की सिस्टम होती है

1) Studio Setup :-

स्टूडियो में एक पूरी टीम काम करती है, जो Anchor को लगातार  मार्गदर्शन देते रहते है, जिसमे कहां, कैसे, कब और कितना ब्रेक लेना है यह सब तय रहता है, इसके लिए सभी शेड्यूल पूर्व निर्धारित अनुसार तय ही रहता है, जिस तरह से टीवी चैनल्स काम करते हैं, वैसे ही फॉर्मेट मे काम करता है, इसमे सब से नई और फायदे वाली बात यह है कि जिस किसी भी subject के लिये पर्याप्त (पूरा) समय मिलता है, स्टुडियो मे भी बड़ी स्क्रीन, जिमी केम शूट, लाइटिंगस और ऑडिट रुम रहता है।

2) OB Relay :-

ओबी रिले या ग्राउंड सेटअप से प्रोग्राम लाइव हो तब इतना ज़्यादा समय रहता नही है, खासकर किसी फूटबाल मैच या क्रिकेट मैच में, क्योंकि बल्लेबाज कहा किस दिशा मे शॉट मारेगा यह तय नहीं होता, studio में एक स्वचालित कैम सेटअप की आवश्यकता बहोत ही कम रहती है, क्योंकि Top view को दर्शाना नहीं होता है, जबकि क्रिकेट में गेंद कितनी ऊंची गयी है यह View दूर से लिये गये कैमरा से ही पता लगाया जाता है, जिसे Maximum Zoom Out Panel (अधिकतम ज़ूम आउट पैनल) कहा जाता है, ओबी रिले में जमीन पर सभी गतिविधियों की रिकॉर्डिंग करनी रहती है, इसके लिए कोई स्टुडियो की आवश्यकता नहीं रहती, लेकिन आजकल आईपीएल और विश्व कप जैसे मैचों के लिये एक studio बनाया जाता है मगर ज़रुरी नही की जहा मैच हो रही हो हो वही या उसी शहर मे स्टुडियो बनाया जाये, वह दुसरे किसी और जगह पर भी बनाया जा सकता है, ताकि दोनों स्वरूपों की मैच को आसानी से स्विच या लिंक किया जा सकता है।

ओबी रिले सिस्टम में यह टाइप के सभी प्रोग्राम operate ट्रक या वान के अंदर की जाती हैं, मैदान में हजारों की संख्या में आये हुवे दर्शको की आवाज़ सार्वजनिक रूप से सुनाई नहीं देता है इसी लिये इयरपीस का उपयोग किया जाता है, कैमरामैन इसे लाइफ लाइन कहते हैं, जो कमांड को सुनने में मदद करता है।

ब्रॉडकास्टिंग टेक्नोलॉजी सिस्टम मे महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारिया किस किस की है?

1) Master Editor :- मास्टर एडिटर हर वीडियो फूटेज मे से क्या लेना है यह तय करके आगे फॉरवर्ड करता है, इसके लिये खास तरीके के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है, जो कैमरे के वीडियो को डायरेक्ट प्रोसेसिंग zone तक लेकर आता है, जिसमें क्या रखना है और क्या काटना है यह मास्टर एडिटर नक्की करता है, कब कौनसा angle चाहिए यह मास्टर एडिटर द्वारा Command दिया जाता है।

2) Online Editor :- 35 कैमरामेन और दुसरे फ़ोटोग्राफ़र द्वारा ली गयी फ़ोटोस और वीडियो को कौन से movement और moment को किस तरह से लेना, वीडियो ऐंगल मे लेना या फ़ोटो ऐंगल मे लेना यह सारे Co-ordination ऑनलाइन एडिटर द्वारा किये जाते है, बेस्ट फूटेज और बेस्ट सीन की पसंदगी online editor द्वारा की जाती है।

3) Sub Editor :- सब एडिटर पूरी वीडियो मे से जो ज़रुरी है उसे edit करके मास्टर एडिटर को पहोचाता है, जैसे की क्रिकेट मैच मे जब बॉलर विकेट लेता है तब सारे खिलाड़ी खुशी  ज़ाहिर करने के लिये celebration करते दिखायी देते वीडियों मे नज़र आटे है मगर जब replay दिखायी दिया जाता है तब वह celebration वीडियो कटी हूई नज़र आती है, यह काम की ज़िम्मेदारी sub editor की रहती है, इसमे खास प्रकार के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाता है जो liecense version रहता है, हर मैच के दौरान यह liecense की Written permission लेनी पड़ती है, जो continue अपडेट होते रहता है, एक कैमरामेन एसा भी होता है जो match के अलावा के हर moment को capture करता है।

4) video analyst :- वीडियो एनालिस्ट का काम ऑनलाइन एडिटर के साथ co-ordinates करके किसी भी मैच या प्रोग्राम को Analyse करने का रहता है, जैसे क्रिकेट मैच मे हर बोल को धीमी गती या तेज़ गती या फ़्रीज़ करके देखने की permission वीडियो एनालिस्ट के पास रहती है, जब third empire decission या DRS लेने मे आता है तब यह वीडियो फ़ूटेज काफ़ी काम मे आता है, स्कोर या Empire भी इसका Access मांग सकता है, जो ओनलाईन एडिटर से संपर्क मे रहते है, commentry box मे एक अलग से मॉनिटर रहता है जिसमे दिखायी दिया जाता हे की commentor को किस टोपीक पर बोलना है।

Relay time का time shedule कितने वक़्त के लिये रहता है?

अगर देश मे ही किसी प्रोग्राम या मैच का लाइव टेलीकास्ट होता है तो उसका relay time एक second का रहता है, मगर किसी दुसरे देश का प्रोग्राम टेलीकास्ट देश मे प्रस्तूत करना हो तो उसका रिले टाईम तीन से चार सेकण्ड का रहता है, जैसे विदेश मे हो रहे किसी मैच का प्रसारण (Telecast) भारत देश मे करना है तो देश से विदेश जाने की ज़रुरत नही उसके लिये स्पोर्ट्स चैनल को मैच लाइव दिखाने के लिये उसके Rights (अधिकार) स्पोर्ट्स अथॉरिटी से खरीदने पड़ते है और स्पोर्ट्स अथॉरिटी भी इस मैच को Telecast करवाने के लिये उसका किराया देता है, मैच को लाइव टेलीकास्ट करने के लिये चैनल के पास बहोत कीमती कैमरे और सामान मौजूद रहता है।

Relay time क्या है?

Relay time का मतलब होता है की किसी मैच का लाइव वीडियो stadium से कैमरा द्वारा रिकॉर्ड करके किसी TV channel पर लाइव दिखाने तक का जो बिच का वक़्त होता है उसे relay time कहा जाता है, जो की वह टाईम कुछ ही seconds का रहता है, stadium के रिकॉर्डस किये हुवे वीडियो को लाइव करने के लिये दुसरे कई सारे instrument और चीज़ो जैसे Control room, relay room, record room की ज़रुरत पड़ती है, जो स्पोर्ट्स चैनल द्वारा broadcasting वान स्वरूप रूम मे फिक्स किया हुवा होता है।

लाइव मैच को ब्रॉडकास्ट करने के लिये कितने कैमरो का इस्तेमाल किया जाता है?

लाइव मैच को ब्रॉडकास्ट करने के लिये कम से कम 35 कैमरो का इस्तेमाल किया जाता है यह तमाम video cam होते है, इसके अलावा 30 से ज़्यादा मल्टीलेन्स कैमरा और टॉप व्यू ऐंगल लेने के लिये ड्रॉन कैमरे का इस्तेमाल किया जाता है, इसके साथ साथ केबल, बैटरी , कंट्रोल रूम वान, रिले स्टेशन वान, रिकॉर्ड रूम वान का भी इस्तेमाल किया जाता है, यह तमाम HD (high defination) और 4k relay technology setup स्वरूप रहता है, इसे सारे सिस्टम को continue broadcast सिस्टम कहा जाता है।

भारत देश की पहली सरकारी Broadcasting कंपनी कौनसी है?

भारतीय रेडियो प्रसारण की पहली संगठित शुरुआत 23 जुलाई 1927 को इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी के बॉम्बे केंद्र से हुई थी, वर्ष 1930 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने इस माध्यम के महत्व को समझते हुए इसे अपने नियंत्रण में लेकर इंडियन स्टेट ब्रॉडकास्टिंग सíवस का नाम दिया जो 1936 से ऑल इंडिया रेडियो के नाम से पहचाना जाने लगा, स्वतंत्रता के बाद सूचना प्रसारण मंत्रालय ने इस एकमात्र सार्वजनिक सरकारी प्रसारण माध्यम का नामकरण आकाशवाणी कर दिया।

National Broadcating day ( राष्ट्रीय प्रसारण दिवस ) किस दिन मनाया जाता है?

पूरे भारत में 23 जुलाई को राष्ट्रीय प्रसारण दिवस मनाया जाता है, इस दिन 1927 में, देश में पहली बार प्रसारित होने वाला रेडियो प्रसारण भारतीय प्रसारण कंपनी के तहत बॉम्बे स्टेशन से हुआ।

ब्रॉडकास्टिंग टेक्नोलॉजी क्या है आर्टिकल का आखरी शीर्षक

मे आशा करता हू की मेरा यह Article आपको ज़रूर अच्छा लगा होगा और आपने इस पोस्ट (ब्रॉडकास्टिंग टेक्नोलॉजी क्या है?) की माध्यम से बहोत कुछ सिखा होगा।

मेरा यही लक्ष्य रहा है की आप जब मेरा यह आर्टिकल Broadcating technology क्या है? को पढ़ें तो आप को इस के related पुरी के पुरी जानकारी प्राप्त हो वह भी हिन्दी मे सरल शब्दो द्वारा।

अगर आप यह Article के प्रति कुछ कहना चाहते है या कोई शंका है तो आप नि:संकोच होकर निचे Comments मे बता सकते है।

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