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GPS क्या है? वह कैसे काम करता है? What is GPS ? How work GPS IN HINDI

आप ने मोबाइल से या कार मे मौजूद Device से रास्ता ढूँढने के लिये गूगल Map का इस्तेमाल किया होगा और वह कौनसी चीज़ है जिसकी मदद से आप रास्ता, किसी जगह का Address ढूँढ पाते हो, वह है GPS, तो चलिये हम आपको पुरी जानकारी देते है की GPS क्या है? और वह कैसे काम करता है? वह भी हिन्दी मे सरल शब्दों द्वारा।

दुनिया की नयी नयी टेक्नोलॉजी कि मदद से आज पूरे दुनिया मे इन्सानो को उनके हर काम मे काफ़ी मदद और राहत मिल रही है और टाईम भी काफ़ी कम इस्तेमाल होता है, वैसे ही आज हम एक टेक्नोलॉजी के बारे मे बतायेंगे जिसको हम सब GPS के नाम से जानते है, आज दुनिया मे ज़्यादातर लोगो के पास स्मार्ट्फ़ोन है और हर स्मार्ट्फ़ोन मे गूगल मैप की जीपीएस टेक्नोलॉजी की सुविधा मौजूद है, आपने काफ़ी बार इसका इस्तेमाल भी किया होगा कही सफर करने के दौरान, पहले लॉग अपना सफर करने के लिये दिशा पर निर्भर रहते थे और वह दिशा आसमान के तारो के समूह देखकर तय करते थे और आज हम सेटेलाईट उपग्रह टेक्नोलॉजी की मदद से आसानी और चुटकियो मे दिशा और लोकेशन का पता कर लेते है, आज हम सभी की जरूरत है की एकदम आसान और हाथ से Operate होने वाला जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) रिसीवर यह पता लगाने के लिए कि हम दुनिया में कहीं भी हो लेकिन हमें अभी भी यह पता लगाने के लिए आकाश में उच्च वस्तुओं की आवश्यकता है कि हम कहां हैं और हम अन्य स्थानों पर कैसे पहुंचते हैं।

तारों के बजाय, हम उपग्रहों का उपयोग करते हैं। 30 से अधिक नेविगेशन उपग्रह पृथ्वी के ऊपर उच्च के आसपास घूम कर रहे हैं। ये उपग्रह हमें बता सकते हैं कि हम कहाँ हैं।

तो चलिये हम आपको GPS क्या है उसके बारे मे पुरी जानकारी बताते है वह भी हिन्दी मे सरल शब्दो द्वारा।

GPS क्या है? What is GPS

GPS एक उपग्रह-आधारित रेडियोनैविगेशन प्रणाली है, यह वैश्विक नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) में से एक है, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) उपग्रहों, ग्राउंड स्टेशन और रिसीवर से बना है, GPS एक सिस्टम है। यह तीन भागों से बना है: उपग्रह, ग्राउंड स्टेशन और रिसीवर।

GPS का फुलफोर्म क्या है?

GPS का फुलफॉर्म ( Global Positioning System ) जिसको हिन्दी मे वैश्विक स्थिति निर्धारण प्रणालि कहते है।

GPS का इस्तेमाल किस लिये किया जाता है?

इस्तेमाल दुनिया की कोई भी चीज़े, रास्ते, जगह को ढूँढ़ने के लिए और मौसम की जानकारी प्राप्त करने के लिये किया जाता है, एक जगह से दुसरी जगह का रास्ता देखने के लिये पोज़ीशन और डेस्टिनेशन दोनो अनिवार्य है, इसके बिना रूट को ढूँढ़ना थोड़ा मुश्किल रहेगा, GPS पुरी दुनिया के नागरिको को अपने बिज़नेस मे और दुसरी बहोत सारी चीज़ो को ढूँढ़ने मे महत्वपूर्ण सेवा प्रदान करता है, पुरी दुनिया के देशो की सैन्य क्षमता को मजबुत बनाता है जिस्से वह अपने प्रतिस्पर्धी दुश्मनो की तमाम गतिविधियों पर नज़र बनाये रखता है, पुरी दुनिया मे मौसम किस प्रकार है उसकी जानकारी भी हासिल कर सकते है, जीपीएस से दुनिया मे आने वाली कुदरती आफ़तो का अंदाजा लगाया जाता है जिस्से उससे बचने के उपाय किये जा सके।

GPS यह 30 से ज़्यादा satellite उपग्रह से बना हुवा नेटवर्क समूह है जिसे दुनिया के बाहर अंतरिक्ष मे रखा हुवा है, GPS हर मौसम मे 24 घंटे काम कर सकता है, जीपीएस को उपयोगकर्ता द्वारा किसी भी डेटा को प्रसारित करने की आवश्यकता नहीं होती है, और यह किसी भी स्मार्ट्फ़ोन या इंटरनेट रिसेप्शन को स्वतंत्र रूप से संचालित करता है।

GPS की शुरुआत किसके द्वारा की गयी और कब की गयी?

जीपीएस का डिज़ाइन आंशिक रूप से ग्राउंड-आधारित रेडियो-नेविगेशन सिस्टम पर आधारित है, सबसे पहले लोरान और डेका नेविगेटर 1940 के दशक में विकसित किए गए थे।

1955 में फ्रेडवर्ड विंटरबर्ग ने सामान्य सापेक्षता के परीक्षण का प्रस्ताव दिया। GPS का यंत्र सबसे पहले Russia ने 1957 में बनाया था, जो Sputnik I Satellite था और इसे अमेरिका ने पनडुब्बी नेविगेशन (Submarine Navigation) के लिए इस्तेमाल किया।

जीपीएस परियोजना की शुरुआत 1973 में अमेरिकी रक्षा विभाग ( U.S Defense Department) द्वारा की गई थी, जीपीएस American navigation System अंतर्गत काम करता है जिसे NAVSTAR कहा जाता है,जिसमें पहला प्रोटोटाइप अंतरिक्ष यान 1978 में लॉन्च हुआ था और 1993 में 24 उपग्रहों के पूर्ण तारामंडल का संचालन हुआ था।

GPS का Military और PUBLIC मे इस्तेमाल कब होने लगा?

जीपीएस प्रोजेक्ट को संयुक्त राज्य अमेरिका में 1973 में लॉन्च किया गया था, पिछले नेविगेशन सिस्टम की सीमाओं को पार करने के लिए, 1960 के दशक से वर्गीकृत इंजीनियरिंग डिजाइन अध्ययन सहित कई पूर्ववर्तियों के विचारों को एकीकृत किया गया था। अमेरिकी रक्षा विभाग(U.S Defense Department) ने प्रणाली विकसित की, जिसमें मूल रूप से 24 उपग्रह थे। यह शुरू में संयुक्त राज्य अमेरिका की सेना द्वारा उपयोग के लिए विकसित किया गया था और 1995 में पूरी तरह से चालू हो गया। उसके बाद 1980 के दशक से नागरिक उपयोग की अनुमति दी गई थी।

GPS किस तरह काम करता है?

GPS system मे पृथ्वी के जमीन स्तर से 19,300 किलोमीटर उपर अंतरिक्ष मे मौजूद 30 से ज़्यादा उपग्रहो को signals भेजे जाते है, उपग्रह हर 12 घंटे मे पृथ्वी की एक परिक्रमा करता है, वह लगभग 11,200 किलोमीटर की बहोत ज़्यादा गती से घंटा है।
जब उपग्रह पृथ्वी के चक्कर लगाता है उसमे तब पृथ्वी से भेजे गये signals फ़ायर होते है और वह सिग्नल को उपग्रह recive करता है, जिसमे radio signal detection code होते है, जिसे वह समझकर उसकी maping तैयार करके जिस किसी भी Device को वापस भेजता है।

किसी भी समय, पृथ्वी पर एक रिसीवर की दृष्टि में कम से कम 4 जीपीएस उपग्रह हैं। इनमें से प्रत्येक GPS उपग्रह अपनी स्थिति और वर्तमान समय के जीपीएस रिसीवर को समय के निश्चित नियमित इंस्टेंट पर जानकारी भेजता है। यह जानकारी रिसीवर को सिग्नल के रूप में प्रेषित की जाती है जो तब रिसीवर डिवाइस द्वारा इंटरसेप्ट की जाती है। ये सिग्नल रेडियो सिग्नल हैं जो प्रकाश की गति से यात्रा करते हैं। एक जीपीएस रिसीवर और उपग्रह के बीच की दूरी की गणना जीपीएस उपग्रह से भेजे गए समय और जीपीएस रिसीवर द्वारा सिग्नल प्राप्त करने के समय के बीच अंतर का पता लगाकर की जाती है।

एक बार जब रिसीवर कम से कम तीन उपग्रहों से संकेत प्राप्त करता है, तो रिसीवर फिर त्रिपक्षीय प्रक्रिया का उपयोग करके अपने स्थान को इंगित करता है। 2-D स्थिति (एक मानचित्र पर अक्षांश और देशांतर) की गणना के लिए एक GPS को कम से कम 3 उपग्रहों की आवश्यकता होती है। इस मामले में, जीपीएस रिसीवर मानता है कि यह मीन समुद्र तल पर स्थित है। हालांकि, रिसीवर को 3-डी स्थिति (अक्षांश, देशांतर और ऊंचाई) खोजने के लिए कम से कम 4 उपग्रहों की आवश्यकता होती है।

GPS में कितने उपग्रह होते हैं?

GPS सैटेलाइट बेसलाइन उपग्रह नक्षत्र (Orbit) में 6 उपग्रह होते है जिसमे से 6 पृथ्वी-केन्द्रित कक्षीय विमानों में चार ऑपरेशन उपग्रह और प्रत्येक कक्षीय विमान में एक अतिरिक्त उपग्रह स्लॉट के साथ 24 उपग्रह होते हैं। प्रणाली कक्षा में तीस उपग्रहों के एक नक्षत्र का समर्थन करता है।

आप कोनसी जगह पर है यह GPS किस तरह पता लगाता है?

जैसे की आप जानते है की GPS पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले 30 से ज़्यादा नेविगेशन उपग्रहों की एक प्रणाली है। हम जानते हैं कि वे कहां हैं क्योंकि वे लगातार संकेत भेजते हैं। आपके फ़ोन में GPS रिसीवर इन संकेतों को सुनता है। एक बार जब रिसीवर चार या अधिक जीपीएस उपग्रहों से अपनी दूरी की गणना करता है, तो यह पता लगा सकता है कि आप कहां हैं।

GPS सिस्टम के 3 महत्त्वपूर्ण Control System भाग

जैसे की हमने उपर आपको बताया हे की GPS एक सिस्टम है और उसके तीन महत्त्वपूर्ण Control System भाग है

1) GPS Satellite (उपग्रह)
2) Ground Station
3) GPS Receiver

GPS Satellite :- GPS सैटेलाइट एक सैटेलाइट नेविगेशन है जिसका उपयोग NAVSTAR ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) द्वारा किया जाता है, जीपीएस उपग्रह पृथ्वी को लगभग 20,000 किमी (12,427 मील) की ऊंचाई पर घेरते हैं और हर दिन दो पूर्ण परिक्रमाएं पूरी करते हैं।

Ground Station :- जीपीएस कंट्रोल सेगमेंट में ग्राउंड सुविधाओं का एक वैश्विक नेटवर्क होता है जो जीपीएस उपग्रहों को ट्रैक करता है, उनके प्रसारण की निगरानी करता है, विश्लेषण करता है, और तारामंडल को कमांड और डेटा भेजता है।

GPS Receiver :- GPS रिसीवर्स ऐसा उपकरण हैं जिनका उपयोग पृथ्वी के ग्रहीय वातावरण में उसकी सटीक भौगोलिक स्थिति को निर्धारित करने के लिए किया जाता है। इन रिसीवरों का उपयोग उपग्रह परिक्रमा के साथ किया जाता है, जो कई उपग्रह संकेतों के बारे में रिसीवर की स्थिति के आधार पर सटीक तीन आयामी स्थिति को त्रिकोण (Triangle) बनाता है। यह महत्वपूर्ण है कि एक सटीक स्थान निर्धारित करने के लिए रिसीवर कम से कम चार उपग्रहों के संपर्क में हो। इस कारण से, जीपीएस सिस्टम की कक्षीय रणनीति में हमेशा किसी भी समय पृथ्वी पर किसी भी बिंदु से कम से कम चार उपग्रह दिखाई देते हैं।
जीपीएस उपकरण पृथ्वी की सतह के बारे में सटीकता के कुछ फीट के भीतर रिसीवर के स्थान को निर्धारित कर सकते हैं। ऐसा करने के लिए उपग्रहों और रिसीवर के बीच एक समय सिंक होना चाहिए। जिस तरह से वे सिंक करते हैं, बल्कि जटिल है, लेकिन ट्रांसमीटर और रिसीवर दोनों पर एक सटीक घड़ी के साथ, प्रसारण के बीच देरी प्रत्येक उपग्रह के बीच रिसीवर को बहुत सटीक दूरी माप करने की अनुमति देती है। चार अलग-अलग उपग्रहों से दूरी की जानकारी का उपयोग करते समय, तीन आयामी स्थानीय सटीकता का निर्धारण करना संभव है।

GPS कौनसी गणितीय बुनियादी चीज़ो पर काम करता है?

जीपीएस पोजिशनिंग दो बुनियादी गणितीय अवधारणाओं पर काम करता है। पहले को त्रयीकरण (trilateration) कहा जाता है, जिसका शाब्दिक अर्थ है तीन दूरियों से स्थिति। दूसरी अवधारणा दूरी की यात्रा, दर (गति) और यात्रा की समय की राशि के बीच का संबंध है।
Distance = Rate × Time

GPS मे त्रिपक्षीय (Trilateration) क्या है?

क्षेत्रों के चौराहे के आधार पर आपकी स्थिति निर्धारित करने की प्रक्रिया है। जब एक रिसीवर को उपग्रह में से एक से एक संकेत प्राप्त होता है, तो यह 3-डी क्षेत्र के क्षेत्र के केंद्र में स्थित उपग्रह के साथ विचार करके उपग्रह से इसकी दूरी की गणना करता है। एक बार जब रिसीवर 3 अन्य जीपीएस उपग्रहों के साथ ऐसा ही करता है, तो रिसीवर 3 स्थानों के चौराहे के बिंदु को खोजने के लिए आगे बढ़ता है ताकि वह उसके स्थान की गणना कर सके।

एक रिसीवर की स्थिति की गणना हो जाने के बाद, जीपीएस डिवाइस आसानी से इन चीजों की गणना GPS Receiver से कर सकता है, जैसे की

• Time of sunrise and sunset
• Speed
• Track
• Distance to destination

GPS की Technically चुनौतिया क्या क्या है?

  • व्यक्तिगत उपग्रहों और जीपीएस रिसीवर के बीच समय सिंक्रनाइज़ेशन (समकालीन)।
  • जीपीएस उपग्रह के सटीक (Exact) स्थान का वास्तविक समय अद्यतन (Time update)।
  • विमान उड़ान के समय का सटीक (Exact) माप।
  • अन्य संकेतों के साथ हस्तक्षेप यानी एक दुसरे signals से टकराना।

GPS का इस्तेमाल कहा कहा किया जाता है?

GPS का उपयोग बहोत सारी जगहो पर किया जाता तो चलिये हम आपको बताते है की कहा कहा इस्तेमाल होता है।

Agriculture (खेती) :- ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) और भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) के संयोजन से सटीक कृषि या साइट-विशिष्ट खेती का विकास और कार्य अब संभव हो गया है। ये प्रौद्योगिकियां सटीक स्थिति की जानकारी के साथ वास्तविक समय के डेटा संग्रह को सक्षम करती हैं, जिससे बड़ी मात्रा में भू-स्थानिक डेटा के कुशल हेरफेर और विश्लेषण के लिए अग्रणी होता है। सटीक खेती में जीपीएस आधारित अनुप्रयोगों का उपयोग खेत नियोजन, फील्ड मैपिंग, मिट्टी नमूनाकरण, ट्रैक्टर मार्गदर्शन, फसल स्काउटिंग, चर दर अनुप्रयोगों और उपज को देखने के लिए किया जा रहा है। जीपीएस किसानों को कम दृश्यता की स्थितियों जैसे बारिश, धूल, कोहरे और अंधेरे के दौरान काम करने की अनुमति देता है।

Aviation (विमान) :- दुनिया भर के एविएटर्स उड़ान की सुरक्षा बढ़ाने के लिए ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) का उपयोग करते हैं। अपनी सटीक, निरंतर और वैश्विक क्षमताओं के साथ, जीपीएस सहज उपग्रह नेविगेशन सेवाएं प्रदान करता है जो विमान उपयोगकर्ताओं के लिए कई आवश्यकताओं को पूरा करता है। अंतरिक्ष-आधारित नेविगेशन द्वारा हवाई अड्डे के लिये विमान प्रस्थान, एन मार्ग और आगमन से उड़ान के सभी चरणों के लिए त्रि-आयामी स्थिति निर्धारण को सक्षम और मज़बूत करता है।

Environment (वातावरण) :-

मानव आवश्यकताओं को संतुलित करते हुए पृथ्वी के पर्यावरण को बनाए रखने के लिए और अधिक जानकारी के साथ बेहतर निर्णय लेने की आवश्यकता होती है। सही और समय पर जानकारी जुटाना, दोनों ही सरकारी और निजी संगठनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है, जिन्हें ये निर्णय लेने चाहिए। ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) उस जरूरत को पूरा करने में मदद करता है।

GPS टेकनोलोजी द्वारा पर्यावरण में परिवर्तनों को समझने और पूर्वानुमान के प्रयासों का समर्थन करती है। मौसम विज्ञानियों द्वारा उपयोग की जाने वाली परिचालन विधियों में जीपीएस मापों को जमा करके, मौसम की भविष्यवाणी की सटीकता में सुधार करते हुए वातावरण की जल सामग्री को निर्धारित किया जा सकता है। इसके अलावा, जीपीएस ट्रैकिंग साइटों के प्रसार, और जीपीएस माप से किसी साइट की स्थिति के सिधे घटक का अनुमान लगाने के लिये, समुद्र के पानी के उछाल के प्रभावों का सीधे निरीक्षण करने का एक अनोखा अवसर पेश करता है।

2010 में, जीपीएस ने मैक्सिको की खाड़ी में बड़े पैमाने पर तेल लिकेज के लिए सफाई कर्मचारियों को जवाब देने में मदद की, जीपीएस रिसीवर द्वारा तेल फैलने की गति और प्रसार को ट्रैक करते हैं। हेलिकॉप्टर जंगल की आग की परिधि को मैप करने के लिए जीपीएस का उपयोग करते हैं और अग्निशमन संसाधनों के कुशल उपयोग की अनुमति देते हैं।

Marine (समुद्र जहाज़) :- ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) ने दुनिया को संचालित करने के तरीके को बदल दिया है। यह समुद्री अभियानों के लिए विशेष रूप से सच है, जिसमें खोज और बचाव शामिल हैं। जीपीएस जहाज़ियो को नेविगेट करने, गति मापने और स्थान निर्धारित करने के लिए सबसे तेज़ और सबसे सटीक तरीका प्रदान करता है। यह दुनिया भर में मरीनर्स के लिए सुरक्षा और दक्षता के स्तर को बढ़ाता है।

जहाज के अधिकारी को खुले समुद्र में और साथ ही भीड़भाड़ वाले बंदरगाह और जलमार्ग में जहाज की स्थिति जानने के लिए समुद्री नेविगेशन में यह महत्वपूर्ण है। समुद्र में रहते हुए, यह सुनिश्चित करने के लिए कि सबसे सुरक्षित, सबसे किफायती और समय स्थिति में जहाज अपने स्थान तक पहुंचने के लिए सटीक स्थिति, गति, और शीर्ष की आवश्यकता कि परिस्थितियो मे GPS बहोत ही ज़रुरी बन जाता है। सही स्थिति की जानकारी की आवश्यकता तब और भी महत्वपूर्ण हो जाती है जब जहाज बंदरगाह से रवाना होता है या पहुंचता है। वेसल ट्रैफ़िक और अन्य जलमार्ग ख़तरों के कारण पैंतरेबाज़ी अधिक कठिन हो जाती है, और दुर्घटनाओं का जोखिम अधिक हो जाता है।

Rail :- दुनिया भर में रेल सिस्टम वास्तविक समय में लोकोमोटिव, रेल कारों, रखरखाव वाहनों और रास्ते के उपकरणों की आनेजाने को ट्रैक करने के लिए जीपीएस का उपयोग करते हैं। जब अन्य सेंसर, कंप्यूटर और संचार प्रणालियों के साथ संयुक्त, जीपीएस रेल सुरक्षा, सुरक्षा और परिचालन प्रभावशीलता में सुधार करता है। ट्रैक क्षमता, ग्राहकों की संतुष्टि और लागत प्रभावशीलता को बढ़ाते हूवे रेल की देरी और रेल परिचालन लागत को कम करने में मदद करती है।

Roads & Highway :-

दुनिया भर में राजमार्गों, सड़कों और पारगमन प्रणालियों पर भीड़ से होने वाली देरी से सैकड़ों अरबों डॉलर की सालाना उत्पादकता में कमी आती है। भीड़ के अन्य नकारात्मक प्रभावों में संपत्ति की क्षति, व्यक्तिगत चोटें, वायु प्रदूषण में वृद्धि और अपर्याप्त ईंधन की खपत शामिल हैं।

ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) का इस्तेमाल राजमार्गों, सड़कों और बड़े पैमाने पर परिवहन प्रणालियों का उपयोग करने वाले वाहनों के लिए क्षमता और सुरक्षा बढ़ाती है। वाणिज्यिक वाहनों के रूटिंग और रवानगी से जुड़ी कई समस्याएं जीपीएस की मदद से काफी कम या समाप्त हो जाती हैं।

जीपीएस की मदद से कई नई क्षमताएं संभव हैं। तत्काल कार पूल संभव है क्योंकि सवारी की इच्छा रखने वाले लोगों को तुरंत पास के क्षेत्र में एक वाहन के साथ मिलान किया जा सकता है।

माल की आवाजाही को ट्रैक और पूर्वानुमान में मदद करने के लिए जीपीएस तकनीक का उपयोग करके एक तार्किक क्रांति की गई है, जिसमें समय-निश्चित वितरण के रूप में जाना जाता है। समय-निश्चित वितरण में, ट्रकिंग कंपनियां वादा किए गए समय पर डिलीवरी और पिकअप की गारंटी के लिए ट्रैकिंग के लिए जीपीएस का उपयोग करती हैं, चाहे वह कम दूरी पर हो या समय क्षेत्र में। जब कोई ऑर्डर आता है, तो डिस्पैचर अपने कंप्यूटर पर छिद्रित करता है जिससे स्क्रीन पर ट्रकों की एक सूची दिखाई देती है, जिनमें से प्रत्येक की स्थिति को ट्रैक कर सकते है यदि कोई ट्रक देर से चल रहा है या मार्ग बंद कर रहा है, तो डिस्पैचर को अलर्ट भेजा जाता है।

Timing :-

देशांतर, अक्षांश और ऊंचाई के अलावा, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) एक महत्वपूर्ण चौथा आयाम प्रदान करता है। प्रत्येक जीपीएस उपग्रह में कई परमाणु घड़ियां होती हैं जो जीपीएस संकेतों में बहुत सटीक समय डेटा का योगदान करती हैं। जीपीएस रिसीवर इन संकेतों को डिकोड करते हैं, प्रभावी रूप से प्रत्येक रिसीवर को परमाणु घड़ियों के साथ सिंक्रनाइज़ करते हैं। यह उपयोगकर्ताओं को परमाणु घड़ियों के मालिक और संचालन की लागत के बिना, एक सेकंड के 100 बिलियन के भीतर समय निर्धारित करने में सक्षम बनाता है।

उदाहरण के लिए, वायरलेस टेलीफोन और डेटा नेटवर्क अपने सभी बेस स्टेशनों को पूर्ण सिंक्रनाइज़ेशन में रखने के लिए जीपीएस समय का उपयोग करते हैं। यह मोबाइल हैंडसेट को सीमित रेडियो स्पेक्ट्रम को अधिक कुशलता से साझा करने की अनुमति देता है। इसी तरह, डिजिटल प्रसारण रेडियो सेवाएं जीपीएस समय का उपयोग यह सुनिश्चित करने के लिए करती हैं कि सभी रेडियो स्टेशनों से बिट्स रिसीवर में पहुंचते है, यह श्रोताओं को न्यूनतम विलंब के साथ स्टेशनों के बीच ट्यून करने की अनुमति देता है।

GPS मुख्य कौन कौनसी चीज़ो पर काम करता है?

1) Location :- स्थल (Place) को पहचान ने के लिये।

2) Tracking :- माल सामन वाले वाहन, कार या व्यकतिगत ट्रेकिंग इस्तेमाल करने के लिये।

3) Timing :- Perfect एवम् exact समय का उपयोग करने के लिये।

4) Mapping :- पुरे दुनिया की कही की वही नक्शा बनाने के लिये।

5) Navigation :- एक जगह से दुसरे जगह पर जाने के लिये।

GPS और Navigation दोनो अलग अलग

जब भी मैप की बात करे तो ध्यान मे एक छोटा सा arrow आता है जो दिशा दर्शाता है, गाड़ी चलाते समय जैसे जैसे गाड़ी आगे बढ़ती है तब Navigation रूट ऑटोमेटिक चालू होता है, कुछ सालो पहले मोबाईल मे Navigation की एक ऐप्लिकेशन अलग से होती थी जो Google Maps मे खुलती थी, अब Google ने Navigation को गूगल मैप से मर्ज कर दिया है वह भी ज़्यादा एडवान्स और आधुनिक Feature के साथ, Navigation डायरेक्शन देता है और GPS डेस्टिनेशन का परफ़ेक्ट लोकेशन दिखाता है, Navigation पसँद करे हुवे रूट का रास्ता बताता है मगर वह जो बेस्ट ऑप्शन होता है वह suggest करता है, आज के दौर मे गूगल मैप की पुरी के पुरी वेबसाईट सर्विस है इसलिए वह मुमकिन सारे के सारे रास्ते ढूंढ़ देता है।

यह तो हुई रोड रास्ते की बात मगर अब हम ज़रा दरियाई navigation पर भी नज़र डाल लेते है, दरिया मे रोड जेसे आसान रास्ते नही होते, जैसे रास्ते के लिये किलोमीटर का इस्तेमाल होता है वैसे दरिया के लिये नोटीकल माइल का इस्तेमाल किया जाता है, इसके अलावा दरिया के बिच मे आने वाले टीले, पहाड़, आई लेन्ड वगेरह का Indication भी वह अलग से देता है, खास करके घाटी विस्तार मे GPS अलर्ट कर देता है, दरिया मे मछली पकड़ने वाले बोट मे भी यह GPS लगा हुवा होता है, जिसमे रूट के बदले दिशा महत्तवपूर्ण दर्शाता है, इसके अलावा सबसे नज़दीक मे लाईट हाउस कहा है और केसे मददगार होगा वह भी बताता है, जबकी यह Advance GPS टेक्नोलॉजी मे उप्लब्ध है।

दुनियाभर मे अलग अलग GPS सिस्टम

दुनिया मे अलग अलग GPS सिस्टम है, जिसे ग्लोबल नेवीगेशन सेटेलाईट सिस्टम ( GNSS ) के रूप मे वर्गीकृत करने मे आया है।
GLONASS रूस द्वारा निर्माण की हूई एक उपग्रह तारातारामंडल प्रणाली है।
यूरोपियन स्पेस एजेन्सी गेलेलियो का निर्माण करता है।
चाइना ने BeiDou का निर्माण किया है।
ज़्यादातर गार्मिंन Receiver GLONASS और GPS दोनो को ट्रैक करता है और दुसरे BeiDou को ट्रैक करते है।
BeiDou की यह सर्विस भारत सरकार ने प्रतिबंध कर दी है, अबसे BeiDou सर्विस Access नही हो पायेगी।

GPS मे Signal Lost होता है क्या?

जवाब है ना,
हर GPS उपग्रह एक संदेश प्रसारण करता है, जिसमे उपग्रह की वर्तमान स्थिति और समय शामिल होता है, GPS रिसीवर बहोत सारे सेटेलाइट के प्रसारण को जोडकर triangle प्रकिया के निरंतर exact स्थान की डिज़ाइन तैयार करता है, रिसीवर को स्थान नक्की करने के लिये 3 उपग्रहो की ज़रुरत होती है, जबकी चार उपग्रहों का होना बेहतर है, क्योकि वह और ज़्यादा शुद्धता पुरी करता है, जिससे सिग्नल लॉस्ट होने का सवाल ही पेड़ा नही होता।

GPS उपग्रह की कुछ interesting जानकारी

• GPS उपग्रह के निर्माण मे 10 वर्ष लगते है।

• एक GPS उपग्रह का वज़न लगभग दो हज़ार पाउन्ड जितना होता है।

• साइड मे लगे सौर पेनल के साथ उसका विस्तार 17 फीट जितना होता है।

• GPS उपग्रह सौर उर्जा से संचालन होता है, जबकी सूरज ग्रहण होता हे तब के लिये उसके पास बैकअप battery मौजूद होती है।

• उसका ट्रांसमीटर पावर 50 वोल्ट और उससे कम का होता है।

GPS क्या है लेख का आखरी शीर्षक

मे आशा करता हू की मेरा यह Article आपको ज़रूर अच्छा लगा होगा और आपने इस पोस्ट ( जीपीएस क्या है? ) की माध्यम से बहोत कुछ सिखा होगा ।

मेरा यही लक्ष्य रहा है की आप जब मेरा यह आर्टिकल GPS क्या है ? को पढ़ें तो आप को इस के related पुरी के पुरी जानकारी प्राप्त हो वह भी हिन्दी मे सरल शब्दो द्वारा।

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