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होलोग्राफ़ी टेक्नोलॉजी क्या है? What is Holography Technology IN HINDI

होलोग्राफ़ी टेक्नोलॉजी एक एसा effect है जिस्से चीज़ो का live एहसास हो और उसका अनुभव आंखो के पलकारो मे माहोल को बदलने की शक्ती प्रदान करने का अनुभव देता है, होलोग्राफ़ी एक static (स्थिर) किरण पारदर्शी display device की मदद से किसी भी object ( वस्तु ) को 3D Dimension मे देख सकते है

होलोग्राफ़ी टेक्नोलॉजी एक एसा effect है जिस्से चीज़ो का live एहसास हो और उसका अनुभव आंखो के पलकारो मे माहोल को बदलने की शक्ती प्रदान करने का अनुभव देता है, भविष्य मे meetings, Conference, Presentation और ग्राफिक्स की दुनिया मे बेमिसाल क्राँति ज़रूर लायेगी उसमे कोई दो राय नही, होलीवुड और बॉलीवुड फिल्मी दुनिया मे यह टेक्नोलॉजी का काफ़ी इस्तेमाल किया जाता है जबकी फिल्मों मे सब कुछ रियल नही होता 3D और होलोग्राफ़ी का इस्तेमाल करके इफेक्ट दिया जाता है, पोलिटिकल दुनिया मे भी पोलिटिकल लीडर अपनी स्पीच देने के लिये इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने लगे है, दुनिया मे हर आये हुवे दिन नयी नयी टेक्नोलॉजी का आविष्कार हो रहा है virtual reality को भी पीछे छोड़ दे एसी नयी टेक्नोलॉजी होलोग्राफ़ीकल ट्रांसपोरटेशन आ रही है, जिसका इस्तेमाल अभी प्रेज़नटेशन से लेकर वीडियो ट्रांसमीशन तक हो रहा है, तो चलिये हम आपको बताते है होलोग्राफ़ी टेक्नोलॉजी क्या है के बारे मे पूरी पूरी जानकारी वह भी हिन्दी मे सरल शब्दों द्वारा।

होलोग्राफ़ी टेक्नोलॉजी क्या है? What is Holography Technology in hindi

होलोग्राफ़ी यानी एक static (स्थिर) किरण पारदर्शी display device की मदद से किसी भी object ( वस्तु ) को 3D Dimension मे देख सकते है, जो ग्राफिक्स और टाईमिंग Sequence की मदद से इस्तेमाल किया जाता है, जिसमे पारदर्शी रंगीन प्रकाश का इस्तेमाल किया जाता है, होलोग्राफ़ी यह शब्द यूनानी होलोस यानी पूर्ण और ग्राफ़ी यानी लेखन से निकला है, इस तकनीक में किसी वस्तु से निकलने वाले प्रकाश को रिकॉर्ड कर बाद में पुनर्निर्मित किया जाता है, जिससे उस वस्तु के रिकॉर्डिंग माध्यम के सापेक्ष छवि (Relative image) में वही हुबहू स्थिति प्रतीत होती है, जैसी रीकॉर्डिंग के समय मे थी, होलोग्राफ़ी image को आप छू नही सकते क्योकि वह पारदर्शि रहता है, उसके आरपार हो सकते है, एक तरह से कहा जाये तो वह visual illusion यानी द्रश्य भ्रम है, दिखने मे वह एक object नज़र आता है मगर उसे छूने पर पता चलता है की वह सिर्फ एक पारदर्शी किरण है।

होलोग्राम की शुरुआत कब और किसके द्वारा हुयी?

होलोग्राफ़ी की शुरुआत ब्रिटिश-हंगेरीयन भौतिक विज्ञानी डैनिस गैबर ने सन 1947 में किया था, जिसे सन् 1960 में और विकसित किया गया जब लेसर किरणो की शोध हुयी, इसके बाद इसे औद्योगिक उपयोग में लाया गया, इसका उपयोग पुस्तकों के कवर पर, सर्टिफ़िकेट पर, क्रेडिट या डेबिट कार्ड पर एक छोटी सी काली पट्टी के रूप में दिखाई देता है, इसे ही होलोग्राम कहा जाता है, यह देखने में त्रिआयामी छवि या त्रिबिंब प्रतीत होती है, किन्तु ये मूल रूप में द्विआयामी आकृति का ही होता है। इसके लिये जब दो द्विआयामी आकृतियों को एक दूसरे के ऊपर रखा जाता जाता है। तकनीकी भाषा में इसे सुपरइंपोजिशन कहते हैं।

होलोग्राफ़ी का एप्लीकेशन क्या है?

1960 मे जब लेसर किरणों का आविष्कार हुवा तब यह टेक्नोलॉजी की पहली मेन्युअल ऐप्लिकेशन बनी थी, होलोग्राफ़ी सिर्फ lighting और laser पर ही काम करता है, कंप्यूटर की खोज बाद उसमे जब ग्राफिक्स add हुवा जैसे टेक्नोलॉजी दुनिया को नये चार चाँद लग गये, घर पर बैठे बैठे आप अपनी दिवालो पर ताजमहल, पानी की झीलें, समंदर के नज़ारे और दुसरे बहोत सारे कुदरती नज़ारे देख सकते हो और उसे फील भी कर सकते है उसमे आप मनपसंद lights का भी इस्तेमाल कर सकते है, रियल टाईम सिस्टम के साथ इसको जोड़कर इसका इस्तेमाल सॉफ्टवेयर मे होता है, बस सिर्फ इतना ही नही जिस तरह से अवाज़ रिकॉर्ड होता है उसी तरह पूरी lighting इफेक्ट को भी रिकॉर्ड कर सकते है, इसका मतलब की व्यक्ति या object पर की focus लाईट को रिकॉर्ड करके वही object को transmitt करके दुसरा वैसा ही हुबहू बता सकते है।

होलोग्राम किस तरह का होता है और कैसे काम करता है?

होलोग्राम के निर्माण में अतिसूक्ष्म ब्यौरे अंकित होने आवश्यक होते हैं, इसको लेजर प्रकाश के माध्यम से बनाया जाता है, लेजर किरणें एक विशेष तरंगदैर्घ्य (Wavelength) की होती है, क्योंकि होलोग्राम को सामान्य प्रकाश में देखा जाता है, यह विशेष तरंगदैर्घ्य (Wavelength) वाली लेजर किरणें होलोग्राम को चमकीला बना देती हैं, होलोग्राम पर चित्र प्राप्त करने के लिए दो अलग अलग तरंगदैर्घ्य (Wavelength) वाली लेजर किरणों को एक फोटोग्राफिक प्लेट पर अंकित किया जाता है, इससे पहले दोनों लेजर किरणें एक बीम स्प्रैडर से होकर निकलती हैं, जिससे प्लेट पर लेज़र किरणों का प्रकाश फ्लैशलाइट की तरह जाता है और चित्र अंकित हो जाता है, इससे एक ही जगह दो छवियां प्राप्त होती हैं, यानि एक ही आधार पर लेजर प्रकाश के माध्यम से दो विभिन्न आकृतियों को इस प्रकार अंकित किया जाता है, जिससे देखने वाले को होलोग्राम को अलग-अलग कोण से देखने पर अलग आकृति दिखाई देती हैं।

मानव आंख द्वारा जब होलोग्राम को देखा जाता है तो वह दोनों छवियों को मिलाकर मस्तिष्क में संकेत भेजती हैं, जिससे मस्तिष्क को उसके त्रिआयामी होने का भ्रम होता है, होलोग्राम तैयार होने पर उसको चांदी की महीन प्लेटों पर मुद्रित किया जाता है, ये चांदी की पर्तें Deflected प्रकाश से बनाई जाती हैं, होलोग्राम की विशेषता ये है कि इसकी चोरी और नकल करना काफी जटिल है, अपनी सुरक्षा और स्वयं को अन्य प्रतिद्वंदियों से अलग करने के लिए विभिन्न कम्पनियां अपना होलोग्राम प्रयोग कर रही हैं। होलोग्राम के प्रयोग से नकली उत्पाद की पहचान सरलता से की जा सकती है।

होलोग्राम का इस्तेमाल कौन कौन सी कंपनीया और गवर्नमेंट किस लिये कर रही है?

• नकली दवाओं की पहचान करने के लिए भारत की प्रमुख औषधि कंपनी ने ग्लैक्सो ने बुखार कम परने वाली औषधि क्रोसीन को एक त्री-आयामी होलोग्राम पैक में प्रस्तुत किया है, यह परिष्कृत 3D होलोग्राम भारत में पहला एवं एकमात्र पीड़ानाशक एंटी पायेरेटिक ब्रांड है।

• होलोग्राम का प्रयोग करने वाली प्रसिद्ध भारतीय कंपनियों में हिन्दुस्तान यूनीलीवर, फिलिप्स इंडिया, अशोक लेलैंड, किर्लोस्कर, हॉकिन्स जैसी कंपनियां शामिल है।

• इसके अलावा रेशम और सिंथेटिक कपड़ा उद्योग के लिए होलोग्राफिक धागों के उत्पादन की योजना भी प्रगति पर है।

• निर्वाचन आयोग के निर्देश अनुसार
मतदाता पहचान पत्र आदि में भी थ्री-डी होलोग्राम का प्रयोग  government द्वारा किया जाता है।

• विद्युत आपूर्ति मीटरों पर बिजली की चोरी रोकने हेतु भी होलोग्राम का प्रयोग होता है।

होलोग्राफ़ीक्स कितने प्रकार के है?

1) फिज़ीकल होलोग्राम :-

डेनियल लेयथिंगर और शेन फोलमर ने एक एसी टेक्नोलॉजी तैयार की के व्यक्ति की कोई भी एसी मूवमेंट (हलन चलन) को स्क्रीन पर बॉक्स फॉर्मेट मे convert हो सके, flat surface पर हाथ फिराने पर उसके छोटे-छोटे 3D टुकड़ों का एहसास हो और हाथ के ग्राफिक्स भी बॉक्स फॉर्मेट मे देखने को मिले, सबसे खास बात यह है की इस डिवाइस base टेक्नोलॉजी की प्रिंट भी 3D ही निकलेगी यानी 3D बॉक्स पेपर पर प्रिंट तो होगी ही साथ ही origional मे भी heating printer मे से यह बॉक्स बाहर आयेगा वह भी लंबाई, चौड़ाई और उचाई के माप के साथ, मगर ओडियो के लिये अलग से चेनल और सॉफ्टवेयर की ज़रुरत पड़ती है।

2) पोर्टेबल होलोग्राफ :-

इन्सान के बाल से भी पतली लाईन बनानी इस पोर्टेबल होलोग्राफ टेक्नोलॉजी मे यह आसान है, स्पीड़ मे उड़ते युद्ध विमान को हर बार निशान बनाकर उड़ा देना मुमकिन नही रहता, तब इस टेक्नोलॉजी की मदद से ग्राफिक्स को Animation के अलावा Video playout भी कर सकते है, वह भी उसके perfect आवाज़ को मर्ज करके, यहा पर एक flat surface की ज़रूर पड़ती है जिससे transmission आसान और स्पष्ट कर सके, इस टेक्नोलॉजी मे lighting effect से उसका रिज़ल्ट इन्सान के शरीर पर अवशोषित किया जा सकता है इसके अलावा इन्सानो के फिंगर प्रिंट के भी लेसर व्यू देख सकते है।

3) लेसर प्लाज़्मा :-

लेसर प्लाज़्मा को कोई भी ऑब्जेक्ट को पॉइंट करने के लिये इस्तेमाल किया जाता है, हवा की दिशा को दिखाने के लिये, lighting flash और इमरजेंसी के वक़्त डायवर्ज़न करने के लिये इस्तेमाल किया जाता है।

4) टेबल होलोग्रांम :-

टेबल होलोग्रांम टेबल सरफेस पर काच की फ्लेट स्लेट पर लाईटिंग की मदद से रिज़्लट देती टेक्नोलॉजी जिसे डिवाइस प्रोग्राम की ज़रुरत रहती है, जिससे काच पर रिजल्ट को अवशोषित किया जा सके, इस टेक्नोलॉजी मे लेसर और जिपियू की मदद से आप बैठे-बैठे टेबल पर पूरी के पुरी इमारत और एअरपोर्ट के रनवे जैसे कई 3D नक्शा देख सकते है, एक फ्लेट स्लेट पर कम से कम 1 GB का डाटा प्रोसेस कर सकते है एसी इसमे 16 block की स्लेट रहती है।

5) बिंब होलोग्राफीक :-

यह प्रतिबिंब जैसी ही टेक्नोलॉजी है, यहा सिर्फ पॉइंट्स का ही कमाल है, छोटे छोटे गोल आकार के पॉइंट्स के cutting को लेसर के साथ जोड़कर object तैयार किया जाता है।

6) AI (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंट)
होलोग्राफ़ :-

प्रोग्राम्स, इलेक्ट्रिकल और सेंसर की मदद से तैयार किया हुवा रोबोट अपना जवाब खुद ढूँढकर दे ओर तुरंत ही निर्णय लेकर मदद करे एसी कुतूहलता लोगो के दिमाग मे बार बार आ रही है, AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंट की मदद से यह चीज़ बिल्कुल मुमकिन है, यह टेक्नोलॉजी बिल्कुल लेटेस्ट है इसलिए इसके features और ऐप्लिकेशन अभी developement स्टेज पर है।

7) फेन टाइप :-

यह चाईनिज दिये जैसा है दिवेट न हो फिर भी प्रकाश दिखे, बस यह भी ऐसा ही है, जैसे पंखे मे से निकलती हुई हवा पर कुछ नाम या लोगो बने और फिर गायब हो जाये जो कि यह डिवाइस पर आधारित है, इस टेक्नोलॉजी का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल Screen Advertising करने के लिये किया जाता है।

8) विज़्युअल इफेक्ट :-

क्या आपने रास्ते पर 3D painting देखी है? उसकी एसी इफेक्ट दिखने को मिलती है की जैसे रास्ते पर खुदाई की हो और चलने वाला व्यक्ति उसे खुदाई समझकर वही पर रुक जाये, मगर 7D टेक्नोलॉजी की मदद से किसी भी प्रकार के टूल्स के बिना सिर्फ flat Surface पर लेसर के सहारे यह इफेक्ट देख सकते है, मगर अभी तो यह technology का जन्म ही हुवा है।

9) मटिरियल फ़्यूज़ :-

इसका इस्तेमाल मीडिया projection मे सबसे ज़्यादा किया जाता है, हज़ारो के आँकड़े मे एक होल मे लोगो को बिठाना आसान नही है, मगर यह टेक्नोलॉजी की मदद से पोस्टर और कट आउट रखने के बजाये पूरा के पूरा व्यक्ति movement करता हुवा तैयार किया जा सकता है जिसके लिये लेसर और होलोग्राफ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

10) नोलोग्राम :-

3D इमेज की lighting आवृत्ति को नोलोग्राम कहा जाता है, आवृत्ति एक ऐसी चीज़ है जैसे टोर्च मे से लाईट निकलती है वैसे एक डिवाइस मे से 3D ऑब्जेच्ट एसे मूव होता है जैसे घर मे बैठे आतिशबाजी के दर्शन कर रहे हो, डिवाइस मे जित्ने ज़्यादा कलर के चिप होंगे उतने ज़्यादा कलर combination देखने को मिलेगा, आप इस टेक्नोलॉजी मे एक ही मिनट मे 700 फायरिंग और ब्लास्टिक इफेक्ट देखने को मिलती है।

होलोग्राम Virual Reality का अद्यतनीकरण (updation)

आने वाले वक़्त मे virtual Reality बॉक्स हमेशा के लिये खतम हो जाये यह मुमकिन हो सकता है, होलोग्राफ़ी टेक्नोलॉजी अभी पहले दर्जे पर है, VR टेक्नोलॉजी मे दुनिया की virtual Reality सूनने और देखने को मिलती है मगर होलोग्राफ़ी टेक्नोलॉजी सर्जन के लिये भी प्लेटफॉर्म देता है, खास प्रकार के सॉफ्टवेयर और वीडियो एडिटर की मदद से जिस किसी भी विषय पर holographics बना सकते है, यह टेक्नोलॉजी की मदद से कई फिल्में बनायी जा चुकि है, यह टेक्नोलॉजी का खास feature यह है की internet की मदद से ओडियो और वीडियो दोनो का transmission करता है, जैसे की स्पेस के बारे मे कोई मीटिंग चल रही हो तो वहा पर सभी को zero gravity का एहसास और आसमान का माहोल यह टेक्नोलॉजी फील करवाता है, एक ही पल मे व्यक्ति का पूरा नक्शा ही बदल जाये और फूंक मारने पर हवा की सनसनाहट की आवाज़ आये यह अब ऑन स्क्रीन और स्क्रीन के बिना भी संभव है।

भविष्य मे होलोग्राफ़ी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कहा कहा किया जा सकता है?

होलोग्राम टेक्नोलॉजी क्षेत्र में कई तरह की शोध अभी चल रही है, होलोग्राफ़ी तकनीक का इस्तेमाल भविष्‍य में कयी तरह के लिये किया जा सकता है,

• बाइक, कार, बस या ट्रक मे मीटर डिस्प्ले के लिये किया जा सकता है।

• स्‍मार्ट फोन में स्‍वास्‍थ्‍य संबन्‍धी सेवाओं के लिये जैसे थ्रीडी होलोग्राम एक्‍सरे या स्‍कैनिंग, अल्‍ट्रासाउण्‍ड जैसी चिकित्‍सीय सेवाओं के लिये किया जा सकता है।

• इंजीनियरिंग क्षेत्र मे मशीनरी टूल्स डिज़ाइन के लिये इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

• टेलीवीजन में इसका प्रयोग संभवत क्रान्तिकारी होगा, जिसमें होलोग्राम डिस्प्ले का इस्तेमाल किया जा सकता है।

• रियल स्टेट क्षेत्र मे बिल्डिंग डिज़ाइन  मोडयूल के लिये यह टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

• भविष्‍य में 3D होलोग्राम मोबाइल और कम्‍प्‍यूटर भी आपके सामने आ सकते हैं।

इसके अलावा और भी कई क्षेत्रों में 3D होलोग्राम तकनीक का प्रयोग किया जा सकता है, यह तो समय ही बतायेगा कि यह तकनीक कहॉ तक विकसित होगी और इस दुनिया को कौनसी नयी चीज़ो का आविष्कारी फल देगी

भारत मे होलोग्राम कौनसी कंपनी बनाती है?

भारत में होलोग्राम बनाने वाली एक बड़ी कंपनी का नाम होलोस्टिक इंडिया लिमिटेड है।

होलोग्राफ़ी टेक्नोलॉजी क्या है आर्टिकल का आखरी शीर्षक

मे आशा करता हू की मेरा यह Article आपको ज़रूर अच्छा लगा होगा और आपने इस पोस्ट (होलोग्राफ़ी टेक्नोलॉजी क्या है?) की माध्यम से बहोत कुछ सिखा होगा।

मेरा यही लक्ष्य रहा है की आप जब मेरा यह आर्टिकल Holography क्या है? को पढ़ें तो आप को इस के related पुरी के पुरी जानकारी प्राप्त हो वह भी हिन्दी मे सरल शब्दो द्वारा।

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